मुझे बचने दे रब्बा! मुझे बचा लो रब्बा! मेरा तक़दीर किसी और के हाथों में क्यों...? मुझे बचने दे रब्बा, मुझे बचा लो रब्बा! जो किस्मत लिखी है मैंने खुद, उसे क्यों बदलने का जुनून है सब? मेरी राहें हैं खुद के चुने, फिर क्यों रोकने का जुनून है सब? मुझे जीने दे अपनी शर्तों पर, मुझे रहने दे अपने इरादों पर। बस मेरा तक़दीर मुझे खुद को लिखने दो। मुझे बचने दो रब्बा! मुझे बचा लो रब्बा! मुझसे मेरी आवाज़ मत छीन, मुझे खुद से खुद का पैगाम है देन। रब्बा, बस एक गुज़ारिश है तुझसे, मुझे मज़बूत बना दे मेरे इरादों से। ना छोड़ूं मैं राह हक़ के सफर में, ना झुकाऊं सर को मैं ज़ुल्म के सामने! बस मेरा तक़दीर मुझे खुद को लिखने दो। मुझे बचने दो रब्बा! मुझे बचा लो रब्बा!